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Association of apartment owners of nbcc green view demand immediate refund of their money with interest and compensation from nbcc

Summary

नई दिल्ली: गुरुग्राम के सेक्टर 37 डी में एसोसिएशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स (AOAO), एनबीसीसी ग्रीन व्यू ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट ने एनबीसीसी (NBCC) से रिफंड की मांग की है। नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (इंडिया) लिमिटेड से हर तरह की कॉस्ट के […]


नई दिल्ली: गुरुग्राम के सेक्टर 37 डी में एसोसिएशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स (AOAO), एनबीसीसी ग्रीन व्यू ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट ने एनबीसीसी (NBCC) से रिफंड की मांग की है। नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (इंडिया) लिमिटेड से हर तरह की कॉस्ट के साथ पूरा पैसा रिफंड करने को कहा है। इसमें रजिस्ट्रेशन फीस और इंटीरियर पर किया गया खर्च भी शामिल है। कहा गया है कि रिफंड 15 फीसदी ब्याज के साथ दिया जाए। दरअसल, एनबीसीसी ग्रीन व्यू ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट (NBCC Green View Housing Project) में बिल्डिंग में इसे बनाए जाने के महज 4 साल में ही क्रैक आने लगे हैं, जिसके चलते वहां रहने वालों को बाहर जाना पड़ा है।


बिल्डिंग को घोषित किया गया असुरक्षित


घर खरीदार यह रिफंड इसलिए मांग रहे हैं, क्योंकि खुद एनबीसीसी ने ही उस बिल्डिंग को असुरक्षित करार दिया है, जिसके चलते वहां रहने वालों को दूसरी जगह जाना पड़ा है। भारत में आजादी के बाद संभवतः ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग को बनने के महज 4 साल बाद ही असुरक्षित करार दिया गया होगा। बिल्डिंग बनाने वाली कंपनी भी कोई ऐसी वैसी नहीं, बल्कि पब्लिक सेक्टर की कंपनी है। बिल्डिंग की हालत देखकर ही समझ आता है कि उसमें रहना खतरे से खाली नहीं।

260 परिवार हुए बेघर

एनबीसीसी की गलती की वजह से करीब 260 परिवार बेघर हो गए। 17 फरवरी 2022 को वहां रह रहे लोगों को बिल्डिंग खाली करने का आदेश दिया गया था। साथ ही डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की तरफ से एनबीसीसी को सभी लोगों के पैसे रिफंड करने को कहा गया था। पैसे रिफंड करने के लिए 1 महीने का समय दिया गया था। हालांकि, उस आदेश का उल्लंघन करते हुए एनबीसीसी ने घर खरीदारों को उनका पैसा नहीं लौटाया है।

नहीं कराई गई सीबीआई जांच

AOAO ने कहा कि सेंट्रल विजिलेंस कमीशन के चीफ टेक्निकल एग्जामिनर की रिपोर्ट में दिसंबर 2019 में ही अनियमितताएं पाई गईं। हालांकि, इसके बावजूद सरकार ने किसी भी सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया। AOAO ने इस बारे में सीबीआई को भी लिखा था, लेकिन आज तक किसी की तरफ से कोई सख्त एक्शन नहीं लिया गया है।

Supertech Ltd. Bankrupt : दिवालिया हुई सुपरटेक लिमिटेड, क्या डूब जाएगा खरीदारों का पैसा?

सुपरटेक लिमिटेड की मुश्किल और बढ़ गई है। पहले तो सुप्रीम कोर्ट ने नियमों के उल्लंघन के चलते नोएडा में सुपरटेक के एमेराल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट के 40 मंजिला दो टावरों को गिराने का आदेश दिया। अब राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण यानी NCLT ने शुक्रवार को रियल एस्टेट फर्म सुपरटेक लिमिटेड को दिवालिया घोषित कर दिया और दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर दी।<br /><br />सुपरटेक को दिवालिया घोषित किए जाने के बाद इसके पूरे न हो चुके प्रॉजेक्ट्स में फ्लैट खरीदने वालों को टेंशन होने लगी है। घर खरीदारों के मन में डर है कि अब सुपरटेक प्रॉजेक्ट्स का क्या होगा, उनके फ्लैट का क्या होगा, क्या उनके लगाए हुए पैसे डूब जाएंगे? अगर पैसे नहीं डूबेंगे तो फ्लैट कब मिलेंगे, वक्त पर मिलेंगे या देरी से मिलेंगे? इन सारे सवालों के जवाब आपको यहां मिलने वाले हैं। सबसे पहले आपको बताते हैं कि…<br /><br /><b>होम लोन EMI का क्या होगा?</b><br />सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद हो सकता है कि बायर्स को अपने घर की प्राप्ति के लिए दावा किए गए वक्त से ज्यादा इंतजार करना पड़े। बायर्स के पास दो विकल्प हैं या तो वे अपनी होम लोन ईएमआई का भुगतान करना जारी रखें, लोन को वक्त पर पूरा चुकता कर दें और फिर अपना फ्लैट मिलने का इंतजार करें।<br /><br />या फिर वे अपने बैंक को यह आवेदन कर सकते हैं कि चूंकि उनके रियल एस्टेट डेवलपर के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया चल रही है, लिहाजा रिजॉल्यूशन प्रॉसेस पूरा होने तक ईएमआई पर मोरेटोरियम लगाया जाए। लेकिन याद रहे कि ईएमआई मोरेटोरियम विकल्प में एक्स्ट्रा भुगतान करना पड़ता है।<br /><br /><b>क्या बायर्स को घबराने की है जरूरत?</b><br />सुपरटेक लिमिटेड का दावा है कि इसके सभी प्रॉजेक्ट वित्तीय रूप से व्यवहार्य हैं क्योंकि हर प्रॉजेक्ट के पास कंप्लीट कंस्ट्रक्शन के मामले में बिक चुकी इन्वेंटरीज से पर्याप्त धनप्राप्ति है।<br /><br />सुपरटेक के सीएमडी आरके अरोड़ा ने कहा है कि कंपनी इस साल के आखिर तक दिल्ली एनसीआर में 6 प्रॉजेक्ट्स के तहत 7000 फ्लैट्स की डिलीवरी करेगी। एनसीएलटी का आदेश सुपरटेक के परिचालनों को प्रभावित नहीं करेगा और कंस्ट्रक्शन जारी रहेगा। दिवाला प्रक्रिया सुपरटेक की केवल एक कंपनी के खिलाफ शुरू की गई है।<br /><br />कंपनी के बयान में कहा गया कि होम बायर्स के हित में कंस्ट्रक्शन और प्रॉजेक्ट की डिलीवरी को वरीयता दी जाएगी। बैंकों का बकाया प्रॉजेक्ट के कंप्लीट होने के बाद भी चुकाया जा सकता है। चूंकि सभी प्रॉजेक्ट वित्तीय रूप से व्यवहार्य हैं, इसलिए किसी भी पार्टी या वित्तीय क्रेडिटर के नुकसान की गुंजाइश नहीं है।<br /><br />एक्सपर्ट का मानना है कि सुपरटेक के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से उसके होम बायर्स को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। उन्हें जितना जल्दी हो सके IRP के समक्ष अपने क्लेम दायर करने चाहिए।<br /><br />क्लेम दायर करने की शुरुआत को लेकर IRP जल्द ही एक तारीख घोषित करेगा और इसके लिए एक वेबसाइट भी लाई जाएगी। हालांकि होम बायर्स को अपने सपनों का आशियाना प्राप्त करने के लिए हो सकता है कि इंतजार करना पड़े।<br /><br /><b>#SupertechBankrupt #Supertech #SupertechInsolvency</b><br />



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